रविवार, 22 सितंबर 2019

क्यों रहना पड़ा था सीता जी को श्री लंका में ?

बात उस समय की है,जब राम और सीता जी की शादी हो चुकी थी।दोनो एकांत में बेठ कर वार्तलाप कर रहे थे।उस समय सीता जी ने राम जी से कहा प्रभु मे बहुत दिनो से आप से एक बात कहना चाह रही हुँ। श्री राम जी मुस्कुराते हुँ कहे कहिए क्या कहना चाहती है आप।सीता जी बोली जब में आपको पहली बार जनकपुर की पुष्प बाटिका में देखा था उसी समय मन ही मन में एक  मन्नत माँगी थी ,कि यदि आप मुझे पति रूप में मिल जाते तो में व्रह्ममण भोजन कराऊगी ।अब जब आप मुझें पति रूप में मिल गये है तो अपना मन्नत पुरी करना चाहती हुँ।राम जी बोले इस में क्या बडी बात है, हमारे राज्य में व्रह्ममनो की कमी है,क्या? जब आप चाहेंगी तब मे तब में एक क्या कई व्रह्ममन को बुला लुंगा, आप अपना मन्नत पुरी कर लिजीएगा ।                                                                                                           तब सीता जी बोली में ऐसे तैसें बह्ममन को भोजन नही कारुगी, जो ब्रह्ममन आज तक किसी के घर भोजन नही किया हो मे उसी व्रह्ममन को कराऊंगी। तब राम जी चिंता मन पड़ गए ऐसा व्रह्ममन में कहाँ से लाऊगा । वे इस बात से भी चिंतीत थे, कि क्योकि सीता जी वचन दे चुके थे। श्री राम जी की तब नारद जी की याद आई क्यों कि तीनो लोक हाल खबर जितना नारद को पता होता है शायद ही किसी की पता हो , इस लिए श्री राम जी देवऋषी नारद जी की याद किये । याद करते ही नारद जी नारायण-नारायणा का जाप करते हुए उपस्थित हो गए। नारद जी हाथ जोड़ कर बोले हे प्रभु आपने इस सेवक को केसें याद किया । राम जी ने सिता जी को दिया हुआ वचन के बारे में बताये और बोले हे महाऋषी आप तो तीनो लोक में भ्रमण करते है , मुझे एक ऐसा व्रह्ममन ढुढ कर ला दिजीए जी आज तक किसी के घर भोजन ना किया हो ।                                                                                                                            नारद जी राम जी की आज्ञा पा कर अपने काम पर लग गये । उन्हे तीनो लोक में एक भी ऐसा व्रह्ममन नही मिला जो किसे क घर भोजन ना किया हो । वे आकाश मार्ग यहि सोचते हुए जा रहे थे कि, राम जी का आदेश का कैंसे पालन किया जाए। तभी अचानक उन्हें आकाश मार्ग से ही रावण की सोने की लंका दिखाई दिया उनकी बांछे खिल गई और वे लंका कि ओर प्रथान किये । नारद जी को पता था कि , यह रावण कर्म से राक्षस है पर जन्म से वह व्रह्ममन है। वे मुनी विश्वसर्वा और कैकसी का पुत्र एक प्रचंड बिद्वान और सर्व वेदों के ज्ञाता  है। वे  लंका नगरी के राजा भी थे। इस लिए किसी के यहाँ भोजन का सवाल नही उठाता । इस लिए नारद जी रावण के पास लंका नगरी चले गये। वहां जा का नारद जी रावण से पुरी वात  बताइ और अयोध्या जा कर भोजन करने की आग्रह किया। रावण भी उदारता दिखाते हुए नारद जी का आमंत्रण स्विकार कर लिया ।
                                                                                                                                                        रावण अयोध्या गये वहाँ सीता जी उनको छपनभोग का भोजन कराई। और बड़ी ही विनम्रता से पुछी महराज आपको दान में क्या दूँ, आप तो ब्राह्मण के साथ -साथ एक प्रतापी रजा भी है। तब रावण ने सीता जी से कहा में दान में कुछ नहीं लेना चाहता हु ,मेरी यही इच्छा है की जेसे में आज आपका आतिथ्य स्वीकार किया है इसी तरह आपको भी मेरा अतिथि बन कर मेरा आतिथ्य स्वीकार करना पड़ेगा मेरे लिए यही सबसे बड़ा उपहार होगा। सीता जी ने रावण को वचन दिया था, कि में एक दिन आपके नगर ने आऊंगा। 
इसी लिए सीता जी रावण की लंका में गुजरना पड़ा था।

शनिवार, 27 अप्रैल 2019

भारत देश का सबसे बड़ा मंदिर कहा पर स्थित है ?

ये मंदिर है तमिलनाडु राज्य के तिरुचिरापल्ली के कावेरी नदी के किनारे रंगम द्वीप पर स्थित जिसका नाम है।

                      श्री रंगम मंदिर                


 ये देश का सबसे बड़ा मंदिर माना जाता है। ये बिष्णु जी का मंदिर है। मानने वाले इस मंदिर को धरती का बैकुंठ मानते है। ये मंदिर 156 एकड़ में फेला  हुआ है। जिसका निर्माण चोल राज कुमार धर्म वर्मा ने करवाया था।


                     कैसे जाये


सबसे नजदीकी रेलवे जंक्शन - सबसे नजदीकी रेलवे जंक्शन तिरुचिरापल्ली रेलवे जंक्शन है, श्री रंगम मंदिर से इसकी दुरी 9 किलोमीटर है।

नजदीकी हवाई अड्डा - सबसे नजदीकी हवाई
 अड्डा भी तिरुचिरापल्ली ही है, जो श्री रंगम मंदिर से 15 किलोमीटर की दुरी पर है।

सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन - सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन श्री रंगम स्टेशन है जो मंदिर से 0.5 किलोमीटर पर स्थित है।

शुक्रवार, 12 अप्रैल 2019

क्यों नहीं हो सका शुभ महुर्त में श्री राम सीता जी का विवाह (पौराणिक कथा)

जब राम सीता जी का विवाह होना तय हो गया तब राजा दशरथ जी न अपने कुल पुरोहित मुनी बशिष्ठ जी और सभी ऋषि मुनियों के साथ विचार बिमर्श कीये और विवाह का शुभ महूर्त बताने की बिनती की ।क्योकि विवाह श्री राम सीता की होनी थी,यह कोई साधारण विवाह तो था नहीं। श्री राम जी बिष्णु जी और सीता जी लक्ष्मी जी का अवतार थे। ये बातें सभी साधु संतो को पता था। इस लिए सभी मुनि गण बड़ी ही सतर्कता के साथ विवाह का शुभ मुहर्त की तलाश में लग गए। बहुत माथा पच्ची के बाद सबने एक मुहर्त पर निकाली।उसके बाद राजा दशरथ को दूस महुर्त के बारे म बताया गया । मुनी बशिष्ठ बोले हे राजन हम लोगो की अथक प्रयास के बाद हम लोगों ने एस शुभ मुर्हत का चयन किया है, जिस महुर्त में विवाह होने पर पति-पत्नी का बिछडाव कभी नहीं होगा,और जिंदगी भर सुख़ शांति से रहेँगे। रजा दशरथ जी बहुत प्रशन हुए और उसी तिथी को ही विवाह करने का शुनिश्चित हुआ।


उधर देव गण वहुत दुखी हुए । देवता गण इस बात स दुखी थे, कि यदि राम सीता जी का विवाह इस महुर्त में हो गया तो वे एक दुसरे से बिछडेगे नही और यदि नही बिछडे तो रावण  नही मरेगा और रावण नही मरा तो देवताओं का दुख दुर नही होगा । दरसल श्री राम जी का मनुष्य जन्म लेनी का कारण ही रावण का बध कर सारे देवी देवताओं , ऋषी मुनीओं तथा सारे मनव जाती को रावण के अत्याचार से मुक्त करना था। तब सभी देवी देवता मिल कर मंत्रणा की गई की, श्री राम जी की शादी इस महुर्त में होने से किसे रोका जाय।                                               

 सबने मिल का एक योजना बनाई । प्राय सभी राजा महाराजाओं के यँहा शादी समारोह में मेहमानो के मनोरंजन के लिए नर्तक नर्तकियां बुलाई जाती थी। इसी बात का फायदा देवताओं ने उठाया वे अपने स्वग पूरी के सबसे बेहतरीन अप्सराओं को वँहा भेज दिया। उन अप्सराओ ने उस समारोह में ऐसा सम्मा बाँधा की सब लोग ये भूल गए की किस महुर्त में हमें विवाह करवाना है। महुर्त बीतने के बाद जल्दी-जल्दी विवाह शुरू हुआ। सभी देवी देवता बहुत प्रसन्न हुए उनका काम हो गया था। अब रावण को कोई नहीं बचा सकता ।
                                             

 श्री राम जी जिस कारन मनुष्य अवतार ले कर इस पृथ्वी पर आये है वो काम अब पूरा हो जायेगा। तब जाकर सभी देवी- देवताओं ने राहत की साँस ली।                          बोलीए श्री राम चंद्र की जय।

शनिवार, 9 मार्च 2019

प्रवचन का साइटिफेक्ट ( हास्य कथा )

एक समय की बात है। एक शहर में भागवत कथा हो रहा था। उसी शहर में एक परिवार रहता था। उस परिवार में पति पत्नी और दोनों बच्चे  थे। अब शहर में प्रवचन आया है तो दोनों को देखने की इच्छा हो रही थी। दोनों यदि एक साथ प्रवचन देखने जाते हैं तो फिर बच्चों का देखभाल कौन करेगा। उन्होंने फैसला किया कि दोनों अलग-अलग दिन में प्रवचन देखने जाएंगे। एक प्रवचन देखने जाएगा दूसरा बच्चा का देखभाल करेगा।  पहला दिन पति गया प्रवचन देखने। उस दिन रामायण की कथा हो रही थी। जिसमें राम जी के पिता दशरथ जी के शादी के प्रसंग  चल रहा था।    वे आदमी बहुत ध्यान से उस कथा को सुना। शाम को घर आया और खाना पीना खाकर सो गया।


दूसरे दिन पत्नी की बारी थी। वह भी सही समय पर सज  धज के प्रवचन देखने चली गई। उस दिन महाराज जी महाभारत के प्रसंग कह रहे थे। जिस में द्रौपदी स्वयंवर की कथा को स्वामी जी बहुत ही सुन्दर भाव से समझा रहे थै। उस सज्जन  ने भी उस कथा को को बडे शांत भाव से सुनी , ऊसे बहुत अच्छा लगा । कथा सुन के वह अपने घर आ गई । फिर से दोनौ की चिन्दगी की गाडी उसी तरह बेड़  आराम से चल रही थी।               


एक दिन किसी बात पर दोनो में झगडा हो गया । लम्बी वहस चली बातो की गोलियाँ दोनो और से दना- दन चल रही थी। तभी पति ने गुस्से से आग बगुला हो कर बोला मुझे ज्यादा गुस्सा मत दिलाओ नही तो अभी भी मेरे पास दो और ऑप्सन बाकी  है।तभी ऊनकी पत्नी तपाक से बोली मुझें भी ज्यादा परेशान मत करो नही तो मेरे पास अभी चार आप्शन वााकी है।
पति का चेहरा देखने लायख थी।

सोमवार, 4 फ़रवरी 2019

तुम्हे मुबारक हो

काँटों से घिरे इस वन से,
अपना ना हो कोई उस आँगन से।
आये  थे  जिस  मेले  से    तुम , 
उस         मेले       से  ।
                        बिदाई तुम्हे मुबारक हो।                                                          
जिस रास्ते तुम गए  ,
उसी रस्ते सबको जाना है।
फर्क इतना तुम आज गए,
हमें बाद में जाना है।
जल्दी पहुँचो हे महान आत्मा,

                    परमात्मा तुम्हे मुबारक हो।

जो शारीर तुमने छोड़ा,
वह माटी था माटी में मिल गया।
उसमे जो आत्मा थी उसे प्रणाम,
तुम्हारे आत्मा का परमात्मा से ।

                      मिलन का तुम्हे मुबारक हो।












चमचागिरी

चमचागिरी का है जमाना,
इससे यारो तुम बच के रहना।
चमचागिरी करने वाले होते बेईमान,
अपने स्वार्थ के खातिर,
करते  सबकोे परेशान।
अगर न होते ये चमचे,
होते कितने अच्छे,
चेन से जीते सब,
रहता सबसे प्यार,
बड़े छोटे का यँहा,
होता न दिवार।
चमचों की इस दुनियां ने,
बहुतो को मारे,
उसमे से एक हम है 'बेचारे'।

बुधवार, 30 जनवरी 2019

सावन महीना

छाई घटा घनघोर नांचे वन में मोर ।
जल ही जल चहुँओरमेढ़क करता शोर ।
छम -छम -छम बुंदो का पड़ना।
सान -सन -सन हवां का बहना।
मस्त हो कर पेडों का झुमना।
लगता सबको बड़ा सुहाना ।
हल ले चले किसान भाई ।
और माँ बहने करने धान रुपाई।
किसानों के बेलो का हाँकना।
झुण्ड में धान रोपनीयोंका गाना।
फिजाओं में बहता यही तराना।
तब लगता आया सावन महीना।