शनिवार, 27 अप्रैल 2019

भारत देश का सबसे बड़ा मंदिर कहा पर स्थित है ?

ये मंदिर है तमिलनाडु राज्य के तिरुचिरापल्ली के कावेरी नदी के किनारे रंगम द्वीप पर स्थित जिसका नाम है।

                      श्री रंगम मंदिर                


 ये देश का सबसे बड़ा मंदिर माना जाता है। ये बिष्णु जी का मंदिर है। मानने वाले इस मंदिर को धरती का बैकुंठ मानते है। ये मंदिर 156 एकड़ में फेला  हुआ है। जिसका निर्माण चोल राज कुमार धर्म वर्मा ने करवाया था।


                     कैसे जाये


सबसे नजदीकी रेलवे जंक्शन - सबसे नजदीकी रेलवे जंक्शन तिरुचिरापल्ली रेलवे जंक्शन है, श्री रंगम मंदिर से इसकी दुरी 9 किलोमीटर है।

नजदीकी हवाई अड्डा - सबसे नजदीकी हवाई
 अड्डा भी तिरुचिरापल्ली ही है, जो श्री रंगम मंदिर से 15 किलोमीटर की दुरी पर है।

सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन - सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन श्री रंगम स्टेशन है जो मंदिर से 0.5 किलोमीटर पर स्थित है।

शुक्रवार, 12 अप्रैल 2019

क्यों नहीं हो सका शुभ महुर्त में श्री राम सीता जी का विवाह (पौराणिक कथा)

जब राम सीता जी का विवाह होना तय हो गया तब राजा दशरथ जी न अपने कुल पुरोहित मुनी बशिष्ठ जी और सभी ऋषि मुनियों के साथ विचार बिमर्श कीये और विवाह का शुभ महूर्त बताने की बिनती की ।क्योकि विवाह श्री राम सीता की होनी थी,यह कोई साधारण विवाह तो था नहीं। श्री राम जी बिष्णु जी और सीता जी लक्ष्मी जी का अवतार थे। ये बातें सभी साधु संतो को पता था। इस लिए सभी मुनि गण बड़ी ही सतर्कता के साथ विवाह का शुभ मुहर्त की तलाश में लग गए। बहुत माथा पच्ची के बाद सबने एक मुहर्त पर निकाली।उसके बाद राजा दशरथ को दूस महुर्त के बारे म बताया गया । मुनी बशिष्ठ बोले हे राजन हम लोगो की अथक प्रयास के बाद हम लोगों ने एस शुभ मुर्हत का चयन किया है, जिस महुर्त में विवाह होने पर पति-पत्नी का बिछडाव कभी नहीं होगा,और जिंदगी भर सुख़ शांति से रहेँगे। रजा दशरथ जी बहुत प्रशन हुए और उसी तिथी को ही विवाह करने का शुनिश्चित हुआ।


उधर देव गण वहुत दुखी हुए । देवता गण इस बात स दुखी थे, कि यदि राम सीता जी का विवाह इस महुर्त में हो गया तो वे एक दुसरे से बिछडेगे नही और यदि नही बिछडे तो रावण  नही मरेगा और रावण नही मरा तो देवताओं का दुख दुर नही होगा । दरसल श्री राम जी का मनुष्य जन्म लेनी का कारण ही रावण का बध कर सारे देवी देवताओं , ऋषी मुनीओं तथा सारे मनव जाती को रावण के अत्याचार से मुक्त करना था। तब सभी देवी देवता मिल कर मंत्रणा की गई की, श्री राम जी की शादी इस महुर्त में होने से किसे रोका जाय।                                               

 सबने मिल का एक योजना बनाई । प्राय सभी राजा महाराजाओं के यँहा शादी समारोह में मेहमानो के मनोरंजन के लिए नर्तक नर्तकियां बुलाई जाती थी। इसी बात का फायदा देवताओं ने उठाया वे अपने स्वग पूरी के सबसे बेहतरीन अप्सराओं को वँहा भेज दिया। उन अप्सराओ ने उस समारोह में ऐसा सम्मा बाँधा की सब लोग ये भूल गए की किस महुर्त में हमें विवाह करवाना है। महुर्त बीतने के बाद जल्दी-जल्दी विवाह शुरू हुआ। सभी देवी देवता बहुत प्रसन्न हुए उनका काम हो गया था। अब रावण को कोई नहीं बचा सकता ।
                                             

 श्री राम जी जिस कारन मनुष्य अवतार ले कर इस पृथ्वी पर आये है वो काम अब पूरा हो जायेगा। तब जाकर सभी देवी- देवताओं ने राहत की साँस ली।                          बोलीए श्री राम चंद्र की जय।

शनिवार, 9 मार्च 2019

प्रवचन का साइटिफेक्ट ( हास्य कथा )

एक समय की बात है। एक शहर में भागवत कथा हो रहा था। उसी शहर में एक परिवार रहता था। उस परिवार में पति पत्नी और दोनों बच्चे  थे। अब शहर में प्रवचन आया है तो दोनों को देखने की इच्छा हो रही थी। दोनों यदि एक साथ प्रवचन देखने जाते हैं तो फिर बच्चों का देखभाल कौन करेगा। उन्होंने फैसला किया कि दोनों अलग-अलग दिन में प्रवचन देखने जाएंगे। एक प्रवचन देखने जाएगा दूसरा बच्चा का देखभाल करेगा।  पहला दिन पति गया प्रवचन देखने। उस दिन रामायण की कथा हो रही थी। जिसमें राम जी के पिता दशरथ जी के शादी के प्रसंग  चल रहा था।    वे आदमी बहुत ध्यान से उस कथा को सुना। शाम को घर आया और खाना पीना खाकर सो गया।


दूसरे दिन पत्नी की बारी थी। वह भी सही समय पर सज  धज के प्रवचन देखने चली गई। उस दिन महाराज जी महाभारत के प्रसंग कह रहे थे। जिस में द्रौपदी स्वयंवर की कथा को स्वामी जी बहुत ही सुन्दर भाव से समझा रहे थै। उस सज्जन  ने भी उस कथा को को बडे शांत भाव से सुनी , ऊसे बहुत अच्छा लगा । कथा सुन के वह अपने घर आ गई । फिर से दोनौ की चिन्दगी की गाडी उसी तरह बेड़  आराम से चल रही थी।               


एक दिन किसी बात पर दोनो में झगडा हो गया । लम्बी वहस चली बातो की गोलियाँ दोनो और से दना- दन चल रही थी। तभी पति ने गुस्से से आग बगुला हो कर बोला मुझे ज्यादा गुस्सा मत दिलाओ नही तो अभी भी मेरे पास दो और ऑप्सन बाकी  है।तभी ऊनकी पत्नी तपाक से बोली मुझें भी ज्यादा परेशान मत करो नही तो मेरे पास अभी चार आप्शन वााकी है।
पति का चेहरा देखने लायख थी।

सोमवार, 4 फ़रवरी 2019

तुम्हे मुबारक हो

काँटों से घिरे इस वन से,
अपना ना हो कोई उस आँगन से।
आये  थे  जिस  मेले  से    तुम , 
उस         मेले       से  ।
                        बिदाई तुम्हे मुबारक हो।                                                          
जिस रास्ते तुम गए  ,
उसी रस्ते सबको जाना है।
फर्क इतना तुम आज गए,
हमें बाद में जाना है।
जल्दी पहुँचो हे महान आत्मा,

                    परमात्मा तुम्हे मुबारक हो।

जो शारीर तुमने छोड़ा,
वह माटी था माटी में मिल गया।
उसमे जो आत्मा थी उसे प्रणाम,
तुम्हारे आत्मा का परमात्मा से ।

                      मिलन का तुम्हे मुबारक हो।












चमचागिरी

चमचागिरी का है जमाना,
इससे यारो तुम बच के रहना।
चमचागिरी करने वाले होते बेईमान,
अपने स्वार्थ के खातिर,
करते  सबकोे परेशान।
अगर न होते ये चमचे,
होते कितने अच्छे,
चेन से जीते सब,
रहता सबसे प्यार,
बड़े छोटे का यँहा,
होता न दिवार।
चमचों की इस दुनियां ने,
बहुतो को मारे,
उसमे से एक हम है 'बेचारे'।

बुधवार, 30 जनवरी 2019

सावन महीना

छाई घटा घनघोर नांचे वन में मोर ।
जल ही जल चहुँओरमेढ़क करता शोर ।
छम -छम -छम बुंदो का पड़ना।
सान -सन -सन हवां का बहना।
मस्त हो कर पेडों का झुमना।
लगता सबको बड़ा सुहाना ।
हल ले चले किसान भाई ।
और माँ बहने करने धान रुपाई।
किसानों के बेलो का हाँकना।
झुण्ड में धान रोपनीयोंका गाना।
फिजाओं में बहता यही तराना।
तब लगता आया सावन महीना।


गुरुवार, 24 जनवरी 2019

खंभा देख के चलो ( हास्य-व्यग्य)

एक समय की बात है , एक सज्जन की बबी का देहान्त हो गया।वक्त सुवह का था , गाँव वाले सब जमा हुए, चर्चा होने लगी आगे क्या होगा । सब को काम बाँट दिया गया,कोई बाजार चला गया अर्थी का सामान लेने,कोई बांस काट कर टटरी बनाने लगा । सब कोई इधर से उधर भाग दौड़ में लगा था। सब रिस्तेदार भर-भर गाड़ी आ रहे थे। रिस्तेदारो में भी जो कम उम्र के बच्चे(tinagger)  आये थे वे तो एक दम से Facebook WhatsApp लग गए मनो कोई समारोह में आये हो। कोई रो रहा था,कोई किसी को ढाढस बंधा रहा था। माहोल एकदम गमशीन  हो गया।                   

  एक रिस्तेदार ने बड़ी ही सालीनता के साथ उस सज्जन पूछा ,क्या भाई आपके रिस्तेदार सब आ गए, कोई बेटा-बेटी  तो आना वाकी नहीं रहा । उस सज्जन ने एक सरसरी निगाह चारो तरफ डाली और बोला सब कोई आ गया है अब कोई आने वाला नहीं है। तब उस व्यक्ती ने बड़ी ही जिम्बेदारी के साथ अर्थी निकालने की तैयारी शुरू कर दी। बाजार गए लडके भी आ गए थे,सब सामान आ चूका था। अब अंतिम यात्रा निकल चूकी थी।

क्यों की बहुत सारी तैयारी करना पड़ा इस लिए,घाट निकलते-निकलते शाम हो चुकी थी। सब लोग जल्दी-जल्दी घाट की ओर जा रहे थे।सब कोई राम नाम सत्य है,राम नाम सत्य कहे जा रहे थे।और जल्दी-जल्दी पांव बढ़ाये जा रहे थे। क्यों की कोई तो ठण्ड के  डर से हड़बड़ाकर चल रहा था, तो कोई शाम के समय समशान जाने में डर लग रहा था। सब लोग यही सोच रहा था,कि जितना जल्दी जायेगे उतना जल्दी जलाकर घर आपस आ जाएंगे। क्यों कि ठंडी का समय था। सब लोग राम नाम सत्य है का नारा लगते हुए, बड़ी जोश के साथ घाट की और बड़ रहे थे। शाम होने को थी, देहात का रास्ता था, रास्ते के बगल में एक खंभा था , अब थोडा अँधेरा घिर आया था। सब लोग जोश के साथ आगे बड़ रहे थे , अचानक एक जोर की आवाज आई ,जब सबने इस के बारे में जाना तो पता चला अर्थी एक खम्भे से टकरा गई थी। टक्कर इतनी जोरदार थी की मुर्दा उठ कर बैठ गई । सब ने जाकर देखा की मुर्दे का क्या हाल है यह तो आश्चर्य हो गया वह ओरत जी उठी। सब कोई हंसी - खुसी घर आगये खुछ ने कोसा भी " बेकार के इतना मेहनत करवाया " । पति का चेहरा देखने लयख था।
सब कोई अपना -अपना घर चला गया।

कुछ सालो बाद फिर से वह औरत मरी , फिर से उसी तरह से सब तैयारी शुरू हुई तैयारी होत- होते शाम हो गया । अंतिम यात्रा शुरू हुआ सब कोई बड़े जोश के साथ घाट की ओर बड़ रहे थे। सब कोई राम नाम सत्य है राम नाम सत्य की नारा लगा रहे थे।पर वह सज्जन जिसका बीबी मरी थी,वह अब आगे-आगे बड़ी जोश के के साथ चला जा रहा था।और सब लोग जितनी बार राम नाम सत्य है का नारा लगता वह जोर से बोलता।

               खंभा देख के चलो ।
               खंभा देख के चलो ।
               खंभा देख के चलो ।